कोटा: एक शहर जो कोचिंग की चमक और छात्रों की मेहनत के लिए जाना जाता है, आजकल एक अलग ही रंग में रंगा हुआ है. अग्रवाल समाज कोटा में नवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐसा आयोजन करने जा रहा हैं, जो न सिर्फ श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि कारीगरी और मेहनत की मिसाल भी पेश कर रहा है. इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत है ड्राई फ्रूट और कैंडी से बने भव्य महल, जो देखते ही हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. ये महल सिर्फ आंखों की शोभा नहीं बढ़ा रहे, बल्कि इन्हें प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं के बीच बांटा भी जाएगा. बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई इन अनूठे महलों को देखकर हैरान और खुश है.

मेहनत और कला का संगम: अग्रसेन संस्कार सेवा समिति के महामंत्री अशोक अग्रवाल ने बताया कि 6 से 8 अप्रैल तक श्री राम धाम सेवा ट्रस्ट में होने वाले इस विशेष आयोजन में 19 महल और एक गुफा तैयार की जा रही है. ये सभी ड्राई फ्रूट और खाद्य सामग्री से बनाए गए हैं. बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट, अंजीर, खुरमानी, मखाने, इलायची और ऑरेंज कैंडी जैसी चीजों को चाशनी की मदद से जोड़कर इन महलों को आकार दिया गया है. इसके अलावा नवरात्रि के इस पवित्र मौके पर देवी मां और अन्य देवताओं की मूर्तियां भी बनाई गई हैं, जो पूरी तरह से खाद्य सामग्री से तैयार की गई हैं. अशोक अग्रवाल बताते हैं कि "यह आयोजन कोटा की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दुआ के साथ किया जा रहा है. बीते दिनों कोचिंग छात्रों की संख्या में कमी आई थी, लेकिन अब फिर से कोटा को बच्चों की हंसी और समृद्धि से भरने की कोशिश है."

आगरा से आए उस्तादों की जादुई कारीगरी: अशोक अग्रवाल ने बताया कि इन महलों और मूर्तियों को बनाने के लिए आगरा से खास हलवाई और कारीगर बुलाए गए हैं. छोटू उस्ताद, जो इस टीम का हिस्सा हैं, वो कहते हैं कि "इसे बनाना आसान लग सकता है, लेकिन इसमें मेहनत बहुत लगती है. हर एक ड्राई फ्रूट को चाशनी से चिपकाना पड़ता है. एक महल को तैयार करने में 3-4 कारीगरों को 5-6 घंटे लग जाते हैं." दूसरी ओर कारीगर विष्णु सिंघल बताते हैं कि पहले हर महल का नक्शा तैयार किया जाता है. फिर खोपरा गरी और खाद्य रंग से बेस बनाया जाता है और इसके बाद चाशनी के जरिए सामग्री को जोड़कर धीरे-धीरे महल खड़ा किया जाता है. रात को चमकने के लिए इनमें लाइटिंग भी लगाई गई है, जो इन्हें और आकर्षक बनाती है.

40 कारीगर, 10 दिन, और 14 घंटे की मेहनत: 25 मार्च को आगरा से कोटा पहुंची 40 कारीगरों की टीम ने 26 मार्च से काम शुरू किया. सुबह से शाम तक 12 से 14 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद ये भव्य संरचनाएं तैयार हो रही हैं. 20 कारीगर छप्पन भोग और अन्नकूट की प्रसादी तैयार करने में जुटे हैं, तो बाकी 20 महल और मूर्तियां बनाने में लगे हैं. इस आयोजन से जुड़े संजय गोयल बताते हैं कि "हमने भैरवनाथ, लक्ष्मी माता, राधा-कृष्ण, काली मैया, गणेश जी, हनुमान जी, भोलेनाथ, शेरावाली माता और अग्रसेन महाराज की मूर्तियां बनाई हैं. कुछ मूर्तियों में मोती भी लगाए गए हैं. हर महल में करीब 30 किलो सामग्री लग रही है और इसके लिए लाखों रुपए की सामग्री मंगवाई गई है."

लाखों की लागत, श्रद्धा का अनमोल भाव: संजय गोयल ने जानकारी दी कि इस आयोजन के लिए 35 किलो छुआरे, 12 किलो काली मिर्च, 30 किलो मूंगफली, 35 किलो बादाम, 50 किलो ऑरेंज कैंडी, 30 किलो पिस्ता, 40 किलो हल्दी, 30 किलो अखरोट, 40 किलो काजू, 25 किलो खुरमानी, 35 किलो अंजीर, 24 किलो बताशे, और 14 किलो इलायची जैसी सामग्री लाई गई है. इसके अलावा दूध, मावा, शक्कर और मैदा जैसे मिल्क प्रोडक्ट भी इस्तेमाल हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह सब श्रद्धालुओं के लिए अन्नकूट और प्रसादी के रूप में बंटेगा.

कोटा की समृद्धि की कामना: अशोक अग्रवाल का कहना है कि "कोटा की पहचान कोचिंग से है. यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक है, बल्कि शहर की आर्थिक मजबूती और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी है." 6 से 8 अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन में हर कोई इन अनूठे महलों और मूर्तियों के दर्शन कर सकेगा. यह नजारा न सिर्फ आंखों को सुकून देगा, बल्कि कोटा की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि तैयार हो जाइए, कोटा में इस नवरात्रि एक ऐसी मिठास और भक्ति का अनुभव लेने के लिए जो ड्राई फ्रूट के महलों और देवी-देवताओं की मूर्तियों के जरिए आपके सामने आएगी. यह आयोजन मेहनत, कला, और श्रद्धा का एक अनोखा संगम है, जो कोटा को फिर से गुलजार करने की उम्मीद लिए खड़ा है.