Dawood Network Crackdown: तुर्की से भारत लाया गया सलिम डोला, 5000 करोड़ के ड्रग नेटवर्क पर बड़ा वार
विदेश से गिरफ्तारी और सीधे भारत वापसी, ऑपरेशन ने बदली जांच की दिशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए गए एक समन्वित अभियान में भारत को एक बड़ी सफलता मिली है। अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के करीबी और बड़े ड्रग तस्कर माने जाने वाले मोहम्मद सलीम डोला को तुर्की से भारत लाया गया है। इस्तांबुल में 25 अप्रैल 2026 को हुई गिरफ्तारी के बाद कुछ ही दिनों में उसे भारत डिपोर्ट किया गया और दिल्ली पहुंचते ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग नेटवर्क और संगठित अपराध के खिलाफ अपनी रणनीति को तेज कर रहा है।
कौन है सलीम डोला और क्यों अहम है यह गिरफ्तारी
सलीम डोला को लंबे समय से डी-कंपनी के ड्रग नेटवर्क का एक प्रमुख ऑपरेटर माना जाता रहा है। यह नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि एशिया और यूरोप के बीच फैले ट्रांजिट रूट्स पर सक्रिय था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसका नेटवर्क हजारों करोड़ रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ था। उसे इंटरपोल के रेड नोटिस के तहत वांछित घोषित किया गया था, जो यह दर्शाता है कि उसकी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी में थीं।
ऑपरेशन कैसे अंजाम तक पहुंचा
इस पूरे ऑपरेशन में कई एजेंसियों के बीच समन्वय देखने को मिला। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पहले उसकी लोकेशन ट्रैक की, जिसके बाद इंटरपोल के जरिए जानकारी साझा की गई। तुर्की पुलिस ने इस्तांबुल के बेयलिकदुजु इलाके में लक्षित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे डिपोर्ट करने का फैसला लिया गया, जो पारंपरिक प्रत्यर्पण की तुलना में तेज प्रक्रिया होती है। डिपोर्टेशन के जरिए आरोपी को सीधे भारत लाया गया, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सका।
भारत पहुंचने के बाद क्या हो रहा है
भारत लाए जाने के बाद सलीम डोला से विभिन्न एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। इस पूछताछ का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति की भूमिका समझना नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की संरचना को खोलना है।
जांच के प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं:
ड्रग सप्लाई रूट्स कैसे काम करते थे फाइनेंशियल चैनल और हवाला नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स आगे चलकर उसे मुंबई पुलिस को सौंपे जाने की संभावना है, जहां पहले से जुड़े मामलों के साथ उसकी कड़ी जोड़ी जाएगी।
पुराने मामलों से कनेक्शन और नेटवर्क की परतें
जांच एजेंसियां पहले से दर्ज मामलों के साथ भी उसके संबंधों को जोड़कर देख रही हैं। एक बड़े मामले में 126 किलोग्राम मेफेड्रोन की जब्ती और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की जांच में उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा कुछ छापों में नकदी की बरामदगी और अन्य सुराग भी इसी नेटवर्क की ओर इशारा करते रहे हैं। अब उसकी गिरफ्तारी से इन मामलों की कड़ियां और स्पष्ट होने की संभावना है।
डी-कंपनी का बदलता स्वरूप
दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क को लंबे समय से केवल अंडरवर्ल्ड गतिविधियों तक सीमित नहीं देखा जाता। समय के साथ यह नेटवर्क ड्रग तस्करी, हवाला और अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों में भी फैल चुका है। इस नेटवर्क की खासियत यह है कि यह कई देशों में फैले छोटे-छोटे ऑपरेटर्स के जरिए काम करता है, जिससे इसे पूरी तरह ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। सलीम डोला जैसे ऑपरेटर्स इसी संरचना के अहम हिस्से होते हैं, जो जमीन पर लॉजिस्टिक्स और नेटवर्क को संभालते हैं।
तुर्की क्यों बना अहम कड़ी
तुर्की लंबे समय से यूरोप और एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है। ड्रग तस्करी के कई रूट्स इस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। हाल के वर्षों में तुर्की और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ा है, जिससे ऐसे ऑपरेशन्स को अंजाम देना आसान हुआ है।
भारत की बदलती रणनीति
यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह विदेशों में छिपे अपराधियों को पकड़कर वापस लाने पर जोर दे रहा है।
इस रणनीति के तहत:
इंटरपोल का सक्रिय उपयोग इंटेलिजेंस शेयरिंग डिपोर्टेशन को प्राथमिकता जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सके।
नेटवर्क पर असर कितना बड़ा हो सकता है
किसी बड़े नेटवर्क में एक प्रमुख व्यक्ति की गिरफ्तारी तुरंत पूरे सिस्टम को खत्म नहीं करती, लेकिन इससे उसकी कार्यप्रणाली पर असर जरूर पड़ता है। ड्रग सप्लाई चेन में बाधा आती है फाइनेंशियल फ्लो प्रभावित होता है अन्य ऑपरेटर्स पर दबाव बढ़ता है साथ ही यह संकेत भी जाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई दोनों मजबूत हो रही हैं।
आगे की जांच क्या संकेत दे सकती है
पूछताछ और डिजिटल फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट होगा कि नेटवर्क किन-किन देशों में सक्रिय था और किन रास्तों से ड्रग्स की सप्लाई होती थी। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस नेटवर्क के अन्य सदस्य अभी भी सक्रिय हैं और किन क्षेत्रों में उनकी पकड़ बनी हुई है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें सामने ला सकता है।