जयपुर:राजधानी जयपुर के त्रिवेणी नगर क्षेत्र में एकाकी जीवन जी रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और तन्हाई से जुड़ा एक अत्यंत हृदयविदारक मामला सामने आया है। यहाँ एक आवासीय सोसाइटी के फ्लैट में अकेले जीवन यापन कर रहे 90 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हरिश्चंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के लगभग तीन दिनों बाद जब बंद मकान से तीव्र दुर्गंध आने लगी, तब जाकर पड़ोसियों को इस अनहोनी का आभास हुआ। स्थानीय निवासियों द्वारा सूचित किए जाने पर शिप्रा पथ थाना पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और बंद दरवाजे को तोड़कर भीतर प्रवेश किया।

बाथरूम के समीप मिला शव, पैर फिसलने से हादसे की आशंका

फ्लैट का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुई पुलिस टीम को हरिश्चंद्र का शव बाथरूम के समीप निश्चेत अवस्था में पड़ा हुआ मिला। प्राथमिक मैदानी तफ्तीश से यह संकेत मिलते हैं कि बुजुर्ग की जीवनलीला लगभग तीन दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। मृतक के सिर के पिछले हिस्से पर चोट के गंभीर निशान भी पाए गए हैं। मामले की जांच कर रहे शिप्रा पथ थाना प्रभारी हितेश शर्मा के अनुसार, यह पूरी संभावना जताई जा रही है कि फर्श पर अचानक पैर फिसल जाने के कारण बुजुर्ग गिर पड़े और सिर पर गहरी चोट लगने से यह दर्दनाक हादसा हो गया।

समय पर उपचार न मिलने से हुई मौत, बेटी के आगमन पर हुआ पोस्टमार्टम

अकेले रहने के कारण दुर्घटना के समय बुजुर्ग को किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सहायता या प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका, जो उनकी मृत्यु का मुख्य कारण बना। तीन दिन पुराना होने के कारण शव की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलने के उपरांत जब मृतक की पुत्री जयपुर पहुँची, तब पुलिस प्रशासन द्वारा परिजनों की उपस्थिति में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई गई। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक एवं सटीक कारणों का प्रामाणिक खुलासा पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के पश्चात ही संभव हो सकेगा।

संतान के बड़े शहरों में रहने के कारण लंबे समय से एकाकी जीवन जी रहे थे मृतक

पुलिसिया पड़ताल में यह बात भी उजागर हुई है कि 90 वर्षीय हरिश्चंद्र पिछले काफी समय से इस फ्लैट में पूरी तरह अकेले निवास कर रहे थे। उनका एक पुत्र जयपुर शहर में ही अलग स्थान पर रहता है, जबकि दो बेटियाँ दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में कार्यरत व सेटल हैं। जैसे ही पुलिस द्वारा इस अप्रिय घटना की सूचना दूरदराज रह रहे परिजनों को दी गई, परिवार के सदस्य बदहवास स्थिति में घटनास्थल पर पहुँचे, जहाँ इस तन्हाई भरे अंत को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।

एकाकी रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर महानगरों में अकेले जीवन गुजार रहे बुजुर्गों की देखरेख, सामाजिक संवाद और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय निवासियों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि परिजनों या पड़ोसियों द्वारा नियमित रूप से बुजुर्ग का कुशलक्षेम लिया जाता रहता, तो शायद सही समय पर उन्हें अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस दुखद हादसे के बाद पुलिस प्रशासन ने भी आम नागरिकों से अपने बुजुर्ग परिजनों के संपर्क में रहने और अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया है।