बारिश को लेकर बड़ा अलर्ट, जोधपुर और उदयपुर संभाग में अति भारी वर्षा के आसार
जयपुर: राजस्थान में मानसून के पुनरागमन के साथ ही पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई क्षेत्रों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले दो दिनों तक मूसलाधार से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसमी बदलाव आने वाले कुछ दिनों तक लगातार प्रभावी रहेगा, जिसके बाद इसके प्रभाव में आंशिक कमी आने की संभावना जताई गई है।
पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित
प्रदेश के कई हिस्सों में हुई भीषण बारिश के कारण दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। माउंट आबू में 195 मिमी की सर्वाधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि जोधपुर शहर में भारी बारिश के चलते प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके अतिरिक्त पाली, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, बालोतरा और अजमेर समेत राजसमंद और देसूरी के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।
जलाशयों में जलस्तर बढ़ा और कई बांध छलके
बीते कुछ दिनों से जारी लगातार बारिश के कारण राज्य के विभिन्न जलाशयों और बांधों में पानी की आवक बेहद तेज हो गई है। लंबे समय से सूखे पड़े 40 से अधिक प्रमुख बांधों में अब पर्याप्त पानी पहुंच चुका है। वहीं दौसा स्थित मोरेल बांध और टोंक का मानसागर बांध अपनी पूर्ण क्षमता तक भरकर ओवरफ्लो होने लगे हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है।
मौसम विभाग द्वारा संभागवार अलर्ट और विस्तृत चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार उदयपुर और जोधपुर संभागों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में अगले 48 घंटों के दौरान अति भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर और भरतपुर संभागों के भी कई स्थानों पर मध्यम से तेज बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है, जिसको ध्यान में रखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मानसून के असमान फैलाव से कई जिलों में अब भी जल संकट
देर से आगमन और बीच में आए लंबे अंतराल के कारण राज्य में मानसून का वितरण असमान रहा है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, लेकिन प्रदेश के 12 जिलों में अब भी सामान्य से बेहद कम बारिश हुई है। वर्तमान में ब्यावर, बीकानेर, डीडवाना-कुचामन, फलोदी और सलूम्बर जैसे गिने-चुने जिले ही ऐसे हैं जहां औसत से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।