दलित अफसर संग बदसलूकी का आरोप, BJP विधायक पर FIR दर्ज
श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सत्ता पक्ष के विधायक और उनके समर्थकों पर एक दलित प्रशासनिक अधिकारी तथा निजी कंपनी के कर्मचारियों के साथ हिंसक व्यवहार करने के आरोप में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। जवाहर नगर थाना पुलिस ने आरयूआईडीपी के सहायक अभियंता की शिकायत पर राजकार्य में बाधा डालने, मारपीट करने और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि एक सरकारी अधिकारी ने विधायक सेवा केंद्र के भीतर बंधक बनाकर पीटने और जातिसूचक अपमान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है।
बैठक के बहाने बुलाकर जानलेवा हमले का आरोप
शिकायतकर्ता अधिकारी के अनुसार यह पूरा विवाद एक पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसकी शुरुआत कुछ दिन पहले एक आधिकारिक बैठक के दौरान मिली धमकियों से हुई थी। पीड़ित का दावा है कि उन्हें शहर के विकास कार्यों से जुड़ी फाइलों के साथ चर्चा के लिए विधायक कार्यालय बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उन पर शारीरिक हमला कर दिया गया। आरोप है कि विधायक ने अपने हाथ में पहने कड़े से प्रहार किया जिससे अधिकारी की आंख में गंभीर चोट आई है और उनके साथ मौजूद इंजीनियरों को भी बर्बरतापूर्वक पीटा गया। इस दौरान सरकारी दस्तावेजों को छीनने और उन्हें नष्ट करने की बात भी सामने आई है, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्य में हस्तक्षेप को दर्शाता है।
कार्यालय के भीतर बंधक बनाने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश
प्राथमिकी में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकारी और उनके सहयोगियों को विधायक सेवा केंद्र के अंदर खींच लिया गया और डंडों व पाइपों से उन पर हमला किया गया। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अधिकारी के वस्त्र खून से सराबोर हो गए, जिसे कथित तौर पर जबरन बदलवाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया। घटना के पीछे करोड़ों रुपये के विकास प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी की मांग और उससे जुड़ी नाराजगी को मुख्य कारण बताया जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस को सूचित किया है कि यह पूरी अमानवीय घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है, जो इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
पुलिसिया कार्रवाई और प्रशासनिक सुरक्षा पर सवाल
एसपी के निर्देश पर दर्ज हुई इस एफआईआर में विधायक के निजी सहायक और स्थानीय पार्षदों सहित करीब तीस लोगों को नामजद किया गया है, जिसकी जांच अब विशेष सेल द्वारा की जा रही है। पिछले साढ़े तीन दशकों से बेदाग सेवा देने वाले अधिकारी के साथ हुई इस घटना ने सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि मामले की तहकीकात पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी और मेडिकल रिपोर्ट तथा सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले के कारण जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तनाव का माहौल बना हुआ है।