भारत माला प्रोजेक्ट के खिलाफ किसान आंदोलन तेज, हाईवे पर बढ़ी परेशानी
जयपुर:कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भरतपुर-ब्यावर भारतमाला परियोजना के खिलाफ किसानों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा और आंदोलन ने विकराल रूप ले लिया। किसान महापंचायत के आह्वान पर लगभग 500 ट्रैक्टरों के साथ जयपुर की ओर कूच कर रहे किसानों ने जयपुर-सीकर नेशनल हाईवे पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए जाम लगा दिया। भारी संख्या में किसानों के ढोढसर से चौमूं की तरफ बढ़ने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन द्वारा भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर परियोजनाओं को रद्द करने की मांग
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट की अगुवाई में किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा पत्र भेजकर दोनों विवादित परियोजनाओं को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की मांग उठाई है। किसानों ने सरकार को इन योजनाओं की उपयोगिता और जनहित के दावों पर खुली बहस की चुनौती दी है। किसानों का सीधा आरोप है कि सरकार इन प्रोजेक्ट्स को जनता के हित में बताकर इनका महिमामंडन कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत में ये परियोजनाएं पूरी तरह से किसान, ग्रामीण संस्कृति और पर्यावरण के खिलाफ हैं।
भूमि अधिग्रहण से उपजे तनाव और आत्महत्या का गंभीर मुद्दा
आंदोलन के दौरान किसान संगठनों ने भूमि अधिग्रहण के कारण पैदा हुए भारी मानसिक तनाव और अवसाद से एक किसान की मौत का मामला भी जोर-शोर से उठाया। किसानों ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए मृतक के पीड़ित परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा और पुनर्वास देने की मांग की। संगठनों का कहना है कि उन्होंने 17 जुलाई को ही प्रशासन को अपनी रैली और बातचीत के लिए विधिवत आवेदन दे दिया था, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने कोई संवाद स्थापित नहीं किया और प्रशासन आंदोलन को दबाने की कोशिश में जुटा रहा।
वार्ता न होने पर आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाने की चेतावनी
किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर चर्चा के लिए आगे नहीं आती है, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र करते हुए पूरे प्रदेश में फैला दिया जाएगा। उपखंड अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के बाद जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तब किसानों ने जयपुर कूच करने का निर्णय लिया था। फिलहाल पुलिस यातायात को डायवर्ट कर स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन किसानों के कड़े रुख से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।