सिरोही: सिरोही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावों से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में उपभोक्ताओं के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ टैक्स रसीद में कथित गड़बड़ी या राजस्व से जुड़ी किसी तकनीकी त्रुटि को आधार बनाकर बीमा क्लेम को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इस मामले में आयोग ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी पाया है और परिवादी को ब्याज सहित क्षतिपूर्ति राशि, मानसिक संताप तथा परिवाद व्यय का भुगतान करने का कड़ा आदेश दिया है।

बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने का पूरा मामला

मामले के अनुसार परिवादी का वाहन द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से बीमित था। 9 जून 2023 को अहमदाबाद से सिरोही लौटते समय ऊंझा के पास हाईवे पर खड़े एक खराब वाहन से टकराकर परिवादी का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में गाड़ी को काफी नुकसान पहुंचा और उसकी मरम्मत में लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च आया। हालांकि बीमा कंपनी ने यह तर्क देते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि वाहन का गुजरात राज्य का रोड टैक्स जमा नहीं था और जमा की गई टैक्स रसीद निरस्त या फर्जी पाई गई थी। इसके बाद पीड़ित परिवादी ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उपभोक्ता आयोग द्वारा दस्तावेज एवं तथ्यों का गहन अवलोकन

मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष अभिमन्युसिंह राठौड़, सदस्य नवीनचंद्र मिश्रा तथा सदस्या जया मिस्त्री की पीठ ने की। पीठ ने प्रस्तुत दस्तावेजों की गहनता से जांच की और पाया कि दुर्घटना के वक्त वाहन चालक के पास पूरी तरह वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाण-पत्र, पंजीकरण प्रमाण-पत्र और राजस्थान एवं गुजरात दोनों राज्यों का वैध परमिट उपलब्ध था। आयोग ने माना कि दुर्घटना पूरी तरह वास्तविक थी और बीमा कंपनी इस बात का कोई प्रमाण नहीं दे सकी कि टैक्स रसीद की गड़बड़ी का दुर्घटना से कोई सीधा संबंध था।

तकनीकी त्रुटि पर सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों का हवाला

आयोग ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग द्वारा स्थापित सिद्धांतों के तहत यदि किसी नियम के उल्लंघन का दुर्घटना से कोई सीधा संबंध न हो, तो केवल तकनीकी या राजस्व संबंधी खामियों के आधार पर बीमा क्लेम पूरी तरह निरस्त नहीं किया जा सकता। ऐसा करना सीधे तौर पर सेवा में गंभीर कमी के दायरे में आता है। दुर्घटना से असंबंधित कर संबंधी या तकनीकी आधारों पर वैध दावों को खारिज करना उपभोक्ताओं के अधिकारों के खिलाफ है।

क्षतिपूर्ति, मानसिक संताप एवं परिवाद व्यय भुगतान के कड़े आदेश

आयोग ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह सर्वेयर द्वारा आकलित 1,00,953 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि परिवाद दायर होने की तिथि 25 जनवरी 2024 से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ परिवादी को दे। इसके साथ ही बीमा कंपनी को 20 हजार रुपये मानसिक एवं शारीरिक संताप के रूप में और 5 हजार रुपये परिवाद व्यय के तौर पर देने के आदेश दिए गए हैं।