सलूंबर। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए क्षेत्रीय विधायिका शांता देवी मीणा एक बार फिर बेहद सख्त रुख में नजर आईं। झाड़ोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में आयोजित मेडिकल रिलीफ सोसायटी की समीक्षा बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ग्रामीणों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डॉक्टरों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, विधायिका ने दिए तुरंत निर्देश

इस अहम बैठक में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र परमार, सरपंच बसंती देवी मीणा और चिकित्सा प्रभारी डॉ. पंकज डामोर सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की कि झाड़ोल में स्वीकृत होने के बावजूद स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञों को दूसरी जगह तैनात (डेपुटेशन) कर दिया गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए विधायिका ने अधिकारियों को आदेश दिया कि हर गुरुवार (टीकाकरण दिवस) को महिला डॉक्टर और हफ्ते में दो दिन बच्चों के डॉक्टर की ड्यूटी अनिवार्य रूप से झाड़ोल में लगाई जाए।

निर्माणाधीन अस्पताल भवन में मिली कच्ची ईंटें, मौके पर ही लगाई क्लास

बैठक के बाद जब विधायिका ने नए लैबोरेट्री और निर्माणाधीन चिकित्सा भवन का जमीनी मुआयना किया, तो वहाँ घटिया निर्माण सामग्री और कच्ची ईंटें देखकर उनका पारा चढ़ गया। ग्रामीणों की शिकायतों को सही पाते हुए उन्होंने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को मौके पर ही कड़ी फटकार लगाई और काम की गुणवत्ता सुधारने की सख्त हिदायत दी।

"पेटी कॉन्ट्रैक्ट" के खेल पर जताई नाराजगी, जांच के आदेश

निरीक्षण के दौरान विधायिका के सामने यह चौंकाने वाली बात भी आई कि मूल ठेकेदार फर्म ने खुद काम न करके यह निर्माण कार्य किसी दूसरी फर्म को 'पेटी कॉन्ट्रैक्ट' (Sub-let) पर दे दिया है। इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने इस पूरे खेल की उच्च स्तरीय जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में मंजूर नहीं होगा।

जनता के भरोसे और विकास कार्यों से नहीं होगा कोई समझौता

विधायिका शांता देवी मीणा ने अंत में कहा कि क्षेत्र की जनता की सेवा और उनका विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी ढांचों के विकास में पारदर्शिता बरती जाएगी। निरीक्षण के दौरान कन्हैया लाल सुथार, राकेश जैन, वालचंद गतोड़िया सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने विधायिका के इस त्वरित एक्शन की सराहना की।