उदयपुर। में इस बार होली पर्व की तिथियों को लेकर भद्रा और चंद्रग्रहण के कारण असमंजस की स्थिति बनी रही, लेकिन अब ज्यादातर ज्योतिषाचार्यों और पंडितों की राय एकमत हो गई है। शहर में होलिका दहन 2 मार्च को तथा धुलंडी 3 मार्च को मनाई जाएगी। 3 मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा। यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, अमेरिका, अर्जेंटीना, पैराग्वे के कुछ हिस्सों, बोलीविया, ब्राजील, ग्रीनलैंड तथा उत्तरी अटलांटिक महासागर में उपच्छाया प्रवेश के प्रारंभिक चरण में चंद्रास्त के समय दिखाई देगा। भारत में ग्रहण का सूतक सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। ज्योतिषियों के अनुसार आमजन 3 मार्च को धुलंडी मना सकते हैं। मंदिरों में रंगोत्सव 4 मार्च को आयोजित किया जाएगा। श्री मेवाड़ विजय पंचांग के डॉ. रवि शर्मा के अनुसार 3 मार्च को चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पूर्व प्रारंभ होगा। चूंकि यह रंगोत्सव का पर्व है, इसलिए इसमें सूतक का दोष नहीं माना जाता। उन्होंने बताया कि धुलंडी का पर्व दोपहर 3:20 बजे से पूर्व मना लेना उचित रहेगा। ग्रहण मोक्ष सायं 6:48 बजे होगा।

पंडित सुरेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि श्रीधर पंचांग, निर्णय सागर पंचांग एवं मेवाड़ पंचांग के अनुसार 3 मार्च को ही धुलंडी खेली जाएगी। यह पर्व विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तिथियों में मनाया जाता है। इस दिन घरों के देवस्थान एवं मंदिरों में ठाकुरजी की सेवा ग्रहण समाप्ति के बाद की जाएगी। पंडित जगदीश विवाकर के अनुसार 2 मार्च शाम से 3 मार्च तड़के तक होलिका दहन के तीन मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें दहन किया जा सकता है। 3 मार्च को ग्रहण और सुबह से सूतक लगने के कारण मंदिरों में ठाकुरजी एवं पुजारी रंगोत्सव नहीं मनाएंगे। मंदिरों में रंगोत्सव 4 मार्च को आयोजित होगा। होली नजदीक आते ही मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। चंग की थाप पर फाग गीत गूंज उठे और भक्तों ने उत्साहपूर्वक ठाकुरजी के साथ फागोत्सव मनाया। आंवली एकादशी के अवसर पर जगदीश मंदिर में फागोत्सव धूमधाम से मनाया गया। सुबह से अबीर-गुलाल और पुष्पों के साथ होली खेली गई। पूरा मंदिर परिसर भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर नजर आया। गुलाल और अबीर से रंगे श्रद्धालु भजन-कीर्तन के बीच झूमते दिखाई दिए।