शिव पुराण में भी इस मंदिर का जिक्र मिलता है।
सिरोही। जिले के आबूरोड के समीप ऋषिकेश स्थित भद्रकाली माता मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के कारण विशेष पहचान रखता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर 5 हजार साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है। यहां माता भद्रकाली कल्याणी रूप में विराजमान हैं और इस स्थल का उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित मंदिर का विशेष महत्व
यह मंदिर आबूरोड शहर के रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए ऑटो या टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है, जबकि निजी वाहन से आने वाले श्रद्धालु मानपुर सर्किल होते हुए मंदिर पहुंच सकते हैं। मंदिर चारों ओर से अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इसके सामने से एक प्राकृतिक नाला गुजरता है। बारिश के समय श्रद्धालुओं को पानी के बीच से होकर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है, जो इस स्थान की विशिष्टता को दर्शाता है।
राजा अंबरीश की तपस्या से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरावती नगरी के राजा अंबरीश ने यहां वर्षों तक मां भद्रकाली की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ऋषिकेश, कर्णिकेश्वर महादेव और मां काली प्रकट हुए थे। राजा अंबरीश ने मां से इसी स्वरूप में यहां विराजमान रहने का वरदान मांगा, जिसके बाद से माता भद्रकाली कल्याणी रूप में यहां विराजमान होकर भक्तों का कल्याण कर रही हैं। इस मंदिर की विशेषता यह भी बताई जाती है कि यहां माता दो शेरों पर सवार हैं, जिसे अद्वितीय माना जाता है।